दर्द में हूँ ,,दर्द में हूँ ,
ना जाने कब तक सहूंगा ,
सहा जाता नहीं ,
पर फिर भी ना किसी से कहूंगा ...
सोचता हूँ अक्सर साथ बिताये लम्हों हो ,
जब हम आशिक़ थे दीवाने थे ,
जानते थे ठोकरें देगी जिंदगी ,
जान कर भी हर दर्द से अनजाने थे ,
ठण्ड से सिकुड़ता है जिस्म मेरा ,
और में खड़ा मौसम सरद में हूँ ,,,
दर्द में हूँ ,,दर्द में हूँ ,
ना जाने कब तक सहूंगा ,
सहा जाता नहीं ,
पर फिर भी ना किसी से कहूंगा ...
दर्द इतना है , पर साँसे चलती है ,
सोचो दर्द दिया जिसने , वह रोज़ मुझसे मिलती है ,
खड़ा हूँ मैं ,
ज़िद पे अड़ा हूँ मैं ,
काश आये वोह दिन कभी ,
जब हालत देख कर मेरी आह उसकी निकलती है ,
हमदर्दी ,,या दया ही सही ,,
पर यह सोच कर मन लूँगा दिल को की ,
आह तो उसकी मेरे लिए अब भी निकलती है,
दर्द में हूँ ,,दर्द में हूँ ,
ना जाने कब तक सहूंगा ,
सहा जाता नहीं ,
पर फिर भी ना किसी से कहूंगा,,
जब दर्द से भी न दर्द सहा जाएगा ,
इक दिन वोह मौत का मेरी आएगा ,
पता है टूट जायेगी वोह ,
रोना रोकेगी अपना पर न रोक पाएगी वोह ,
फिर उसको साथ बिताया हर पल,
हर लम्हा याद आएगा ,
पर ,,, पर मैं बंद रखूंगा आँखें अपनी ,
और उसे जाने दूंगा ,
प्यार का मेरे अहसास हो उसे ,
यह ख्याल भी न उसे आने दूंगा ,
सारी उम्र सताया है ,
और मैंने हरदम उसे मनाया है ,
पर आज नहीं , मनाऊंगा ,
सफर पे आखिरी मेरे अकेले ही चला जाऊँगा ,
बस उस पल मांगूंगा दुआ मेरे रब से ,
वह खुश रहे सदा , पर तनहा नहीं ,,,
दर्द में हूँ ,,दर्द में हूँ ,
ना जाने कब तक सहूंगा ,
सहा जाता नहीं ,
पर फिर भी ना किसी से कहूंगा ......
राकेश कुमार चौधरी
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