Friday, April 24, 2020

Dard Mein Hoon


दर्द में  हूँ ,,दर्द  में  हूँ ,
ना   जाने  कब  तक  सहूंगा ,
सहा  जाता  नहीं , 
पर  फिर  भी  ना   किसी  से  कहूंगा ...

सोचता  हूँ  अक्सर  साथ  बिताये  लम्हों  हो ,
जब  हम  आशिक़  थे  दीवाने  थे ,
जानते  थे  ठोकरें  देगी  जिंदगी ,
जान  कर  भी   हर  दर्द  से  अनजाने  थे ,
ठण्ड  से  सिकुड़ता  है  जिस्म  मेरा , 
और  में  खड़ा  मौसम  सरद  में  हूँ ,,,
दर्द  में  हूँ ,,दर्द  में  हूँ ,
ना   जाने  कब  तक  सहूंगा ,
सहा  जाता  नहीं , 
पर  फिर  भी  ना   किसी  से  कहूंगा ...

दर्द  इतना  है , पर  साँसे  चलती  है ,
सोचो दर्द दिया जिसने , वह रोज़  मुझसे  मिलती  है ,
खड़ा  हूँ  मैं , 
ज़िद  पे  अड़ा  हूँ  मैं ,
काश  आये  वोह  दिन  कभी , 
जब हालत देख कर मेरी आह उसकी निकलती  है ,
हमदर्दी  ,,या   दया  ही  सही ,,
पर  यह  सोच  कर  मन  लूँगा  दिल  को  की ,
आह  तो  उसकी  मेरे  लिए  अब  भी  निकलती है,

दर्द  में  हूँ ,,दर्द  में  हूँ ,
ना   जाने  कब  तक  सहूंगा ,
सहा  जाता  नहीं , 
पर  फिर  भी  ना   किसी  से  कहूंगा,,

जब  दर्द  से  भी  न  दर्द  सहा  जाएगा ,
इक  दिन  वोह  मौत  का  मेरी  आएगा ,
पता  है  टूट  जायेगी  वोह ,
रोना  रोकेगी अपना पर न रोक पाएगी वोह ,
फिर उसको साथ बिताया हर पल,
हर लम्हा याद आएगा ,
पर ,,, पर  मैं  बंद  रखूंगा  आँखें  अपनी ,
और  उसे  जाने  दूंगा ,
प्यार  का  मेरे  अहसास  हो  उसे ,
यह  ख्याल  भी  न  उसे  आने  दूंगा ,
सारी  उम्र  सताया  है , 
और  मैंने  हरदम  उसे  मनाया  है ,

पर  आज  नहीं , मनाऊंगा , 
सफर  पे  आखिरी  मेरे  अकेले  ही  चला  जाऊँगा ,
बस  उस  पल  मांगूंगा  दुआ  मेरे  रब  से ,
वह  खुश  रहे  सदा , पर  तनहा  नहीं ,,,

दर्द  में  हूँ ,,दर्द  में  हूँ ,
ना   जाने  कब  तक  सहूंगा ,
सहा  जाता  नहीं , 
पर  फिर  भी  ना   किसी  से  कहूंगा ......
                           राकेश कुमार चौधरी

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