Tuesday, August 14, 2018

सरहद पर खड़ा हूँ मैं !

This Post is created as a tribute to our INDIAN Soldiers on 
the occasion of Independence Day 


गाँव की गलियां और दोस्तों का साथ ,
बचपन के खेल और माँ की डांट ,
थक कर चूर सोना बेफिक्री में, चाहे जमीन हो या लकड़ी की खाट,
उस बेफिक्री उस लड़कपन को छोड़ कर ,
यादें कई दिल में समा कर ,
कैसे भी हो हालात
सरहद पर खड़ा हूँ मैं ,


कभी सर्दी , कभी गर्मी , कभी तूफ़ान , कैसा भी हो हाल ,
कुछ पल ,कुछ दिन ,कुछ महीने या फिर साल ,
डरता नहीं , झुकता नहीं , दिल में है बस तू ही मेरी माँ ,
तुझको बचाने हर तकलीफ से , हर दुश्मन से लड़ा हूँ मैं ,
कैसे भी हो हालात
सरहद पर खड़ा हूँ मैं ,
सरहद पर फुर्सत के कुछ पल , जब सुना रेडियो पर कुछ अपनों को ,
इक पल में टूट गया मैं , और टूटते देखा अपने सपनों को ,
खा कर गोली बचाया जिन्हें , और सीने से अपने लगाया जिन्हें ,
सहलाया प्यार से , अपनेपन से , हर दर्द भुलाने को जिन्हें ,
कुछ बेगानों ने उन जख्मों का इलज़ाम हम पर लगाया है ,
हर इलज़ाम सहने को , अपनों को बचाने की ज़िद्द पे अड़ा हूँ मैं ,
कैसे भी हो हालात ,
सरहद पर खड़ा हूँ मैं ,
सहने को हर दर्द बदन को मैंने तपाया है ,
दिल में कितना भी हो दर्द , उसे दिल में ही छिपाया है ,
सह कर चोटें पीठ पर भी अपनों से , अपनों को दुश्मनों से बचाया है ,
जख्मी है बदन , टूटा है दिल भी कभी ,
सिर्फ जिद्द है अपनों को बचाने की , इस ज़िद्द पे सालों से अड़ा हूँ मै,

कैसे भी हो हालात ,
सरहद पर खड़ा हूँ मैं ,
ऐ वतन वालो , शिकवा हो अगर कोई तो शिकायत करो अपनों की तरह ,
कभी टूटे न भरोसा देश का मेरे मुझ पर , टूटे सपनो की तरह ,
दर्द सताए तो सहलाये कोई , इलज़ाम लगें हज़ारों पर फिर भी अपनाये कोई ,
यह देश है मेरा , यह लोग मेरे है , इनके साथ हरदम खड़ा हूँ मैं ,

कैसे भी हो हालात ,

सरहद पर खड़ा हूँ मैं

Jai Hind !!
Rakesh Kumar Chaudhary 
Indian 

Wednesday, June 27, 2018

Jai Hind

दिलों पे सबके हम इक दास्ताँ लिख जाएंगे ,
मिट सके न कभी वह पहचान लिख जाएंगे, 
शहादत देकर हम अपनी जय हिंदुस्तान लिख जाएंगे …..
कैसा भी हो समां हम टूटते नहीं ,
मुश्किलों से लड़ते है हरदम, थक कर कभी रुकते नहीं,
कम पड़े ये जिंदगी भी अगर , चार दिन मांग के नाम वतन के खुदा से थोड़ा और जी जाएंगे …..
शहादत देकर हम अपनी जय हिंदुस्तान लिख जाएंगे …..
हिफाज़त करते हैं जिसकी दिन रात वह देश अपना है …
ना डर है तूफानों का या किसी भी शय का , बस आँखों में एक ही सपना है ,,,
अगर सोचता है कोई पागल के मिटा देगा मेरे देश को !!!
कोई सोचे न फिर कभी , ऐसा उसके जख्मों पे हम निशान छोड़ जाएंगे ,,,
शहादत देकर हम अपनी जय हिंदुस्तान लिख जाएंगे …..
सुन लो कान खोल के ऐ मौत बेचने बालो , इस बार जाग गए शेर सारे तो तेरे देश का तुम्हारे सिर्फ पुराने नक़्शे में नाम छोड़ जाएंगे ,,,,
शहादत देकर हम अपनी जय हिंदुस्तान लिख जाएंगे …..
जय हिन्द ..जय जवान …

                                                                                                                                              राकेश कुमार चौधरी