Friday, August 14, 2020

Desh Prem

 देश प्रेम , देश प्रेम हाँ सबसे बड़ा है देश प्रेम...


हाथ पकड़ के खड़े है हम,

साथ ही आगे बढ़े है हम,

और साथ साथ  ही हर मुश्किल से लड़े है हम,

आँखों में हैं जज्बा देश प्रेम का, और  दिल में है अपने देश प्रेम..


देश प्रेम , देश प्रेम हाँ सबसे बड़ा है देश प्रेम...


हर दिन हमको बात नयी बताता है,

इसरो हो, उरी हो, गाँव का  किसान हो, या फिर वर्ल्ड कप, 

देश मेरा अक्सर इतिहास दोहराता है,

खुशियां आती है, त्योहारों मैं, और दिल मस्ती में खो जाता है,

कभी जो आयी आंधी कोई, तो हर हाथ ढाल बन जाता है,

चिंगारी जो फेके कोई मेरे वतन पे, वजूद उसका मिट जाता है,,

शांति का पाठ पड़ा  है हमने सच है,पर बात है अगर देश की,

तो हर कोई भगत सिंह बन जाता हैं.


माना सपने है आँखों में सबकी, पर सबसे बड़ा है देश प्रेम,

देश प्रेम , देश प्रेम हाँ सबसे बड़ा है देश प्रेम...


कश्मीर हो या हो लद्दाख, कुछ जख़्म हैं जो गहरे है.

कुछ चोर घुस आये जो घर में मेरे,भागे उलटे पाँव, 

आग में कहाँ कीड़े ठहरे हैं .

घायल हुए हम पर टूटे नहीं कभी, 

मत भूलो घायल शेरों की नज़रों में हो तुम गद्दारो , 

हर तरफ यहाँ देश में मेरे तूफानों के  पेहरे हैं.

मर मिटने को तैयार हैं हम सब, 

जात, धरम, और रिश्ते नाते,कुछ भी नहीं देश के आगे ठहरे है,


देश प्रेम , देश प्रेम हाँ सबसे बड़ा है देश प्रेम...


शिकवा नहीं है हिन्दू से, न मुस्लिम और ना सिख ईसाई से,

हम सब है देश, भारत घर है मेरा और हम सब है भाई से,

मत भूलों तुम लड़ाओगे हमको ,

गीता, बाइबिल या कुरान पड़ोगे तुम हमको, 

शिकवा है हमको वतन के गद्दारों से, 

बेचते हैं तो नफ़रत, ऐसे ही कुछ दुकानदारों से ,

एक लड़ाई है सरहद पर , और एक है अंदर छिपे गद्दारों से, 


 देश प्रेम , देश प्रेम हाँ सबसे बड़ा है देश प्रेम,


देश प्रेम के इस दिवस पर हम देश वाले बस यह बात बताते हैं,

छोड़ते नहीं हम उनको जो देश को अपने सताते हैं, 

ना कमी है वीरों की और ना बलिदानों की, 

बात हो देश प्रेम की, घरों में बच्चों को अपने हम हर धर्म से पहले देश प्रेमका पाठ  पढ़ाते हैं, 


देश प्रेम , देश प्रेम हाँ सबसे बड़ा है देश प्रेम,

Friday, April 24, 2020

Dard Mein Hoon


दर्द में  हूँ ,,दर्द  में  हूँ ,
ना   जाने  कब  तक  सहूंगा ,
सहा  जाता  नहीं , 
पर  फिर  भी  ना   किसी  से  कहूंगा ...

सोचता  हूँ  अक्सर  साथ  बिताये  लम्हों  हो ,
जब  हम  आशिक़  थे  दीवाने  थे ,
जानते  थे  ठोकरें  देगी  जिंदगी ,
जान  कर  भी   हर  दर्द  से  अनजाने  थे ,
ठण्ड  से  सिकुड़ता  है  जिस्म  मेरा , 
और  में  खड़ा  मौसम  सरद  में  हूँ ,,,
दर्द  में  हूँ ,,दर्द  में  हूँ ,
ना   जाने  कब  तक  सहूंगा ,
सहा  जाता  नहीं , 
पर  फिर  भी  ना   किसी  से  कहूंगा ...

दर्द  इतना  है , पर  साँसे  चलती  है ,
सोचो दर्द दिया जिसने , वह रोज़  मुझसे  मिलती  है ,
खड़ा  हूँ  मैं , 
ज़िद  पे  अड़ा  हूँ  मैं ,
काश  आये  वोह  दिन  कभी , 
जब हालत देख कर मेरी आह उसकी निकलती  है ,
हमदर्दी  ,,या   दया  ही  सही ,,
पर  यह  सोच  कर  मन  लूँगा  दिल  को  की ,
आह  तो  उसकी  मेरे  लिए  अब  भी  निकलती है,

दर्द  में  हूँ ,,दर्द  में  हूँ ,
ना   जाने  कब  तक  सहूंगा ,
सहा  जाता  नहीं , 
पर  फिर  भी  ना   किसी  से  कहूंगा,,

जब  दर्द  से  भी  न  दर्द  सहा  जाएगा ,
इक  दिन  वोह  मौत  का  मेरी  आएगा ,
पता  है  टूट  जायेगी  वोह ,
रोना  रोकेगी अपना पर न रोक पाएगी वोह ,
फिर उसको साथ बिताया हर पल,
हर लम्हा याद आएगा ,
पर ,,, पर  मैं  बंद  रखूंगा  आँखें  अपनी ,
और  उसे  जाने  दूंगा ,
प्यार  का  मेरे  अहसास  हो  उसे ,
यह  ख्याल  भी  न  उसे  आने  दूंगा ,
सारी  उम्र  सताया  है , 
और  मैंने  हरदम  उसे  मनाया  है ,

पर  आज  नहीं , मनाऊंगा , 
सफर  पे  आखिरी  मेरे  अकेले  ही  चला  जाऊँगा ,
बस  उस  पल  मांगूंगा  दुआ  मेरे  रब  से ,
वह  खुश  रहे  सदा , पर  तनहा  नहीं ,,,

दर्द  में  हूँ ,,दर्द  में  हूँ ,
ना   जाने  कब  तक  सहूंगा ,
सहा  जाता  नहीं , 
पर  फिर  भी  ना   किसी  से  कहूंगा ......
                           राकेश कुमार चौधरी